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'मोबाइल भारत' के लिए युद्ध

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Puneet Manchada.Puneet Manchada.फैकल्टी क्यू एंड ए

भारत का अल्ट्रा-कम्पेटटिव मोबाइल बाजार एक बड़ा शेक-अप से गुजर रहा हैं। दूरसंचार कंपनियां या तो अपने नुकसान को मजबूत कर रही है या कटौती करके निकल रही हैं। पिछले महीने में दो बड़े मर्जर सौदों की घोषणा की गई है।

मिशिगन यूनिवर्सिटी के रॉस स्कूल ऑफ बिजनेस में विपणन के प्रोफेसर पुनेत मनचंदा भारत के दूरसंचार परिदृश्य के बारे में चर्चा करते हैं।

प्रश्न: हाल ही में, टेलीफोन उद्योग में दो बड़े मर्जर हुये हैं: वोडाफोन के साथ आइडिया और एयरटेल के साथ टेलीनॉर। ये मर्जर क्या जरूरी थे?

मनचंदा: वोडाफोन-आइडिया मर्जर प्रकृति में शायद अधिक "आक्रामक" है क्योंकि यह भारत में सबसे बड़ा ऑपरेटर बनाता है, अौर सबसे बड़ा लाभार्थी होगा। एयरटेल और टेलीनॉर विलय शायद अधिक "रक्षात्मक" है क्योंकि भारतीय बाजार के मौजूदा रुझानों से एयरटेल पर सबसे बड़ा नकारात्मक असर पड़ सकता है।

इन दो विलय का अर्थशास्त्र दिलचस्प हैं। यह मर्जर, वोडाफोन-आइडिया को एयरटेल-टेलीनॉर की तुलना में ग्राहक मुद्रीकरण से 27 प्रतिशत अधिक ग्राहक, 42 प्रतिशत अधिक आय देगा। लेकिन, वोडाफोन-आइडिया में 28 प्रतिशत अधिक ऋण भी होगा जो प्रदर्शन पर ड्रैग भी हो सकता है।

प्रश्न: बड़े बाजार के आकार के अलावा, भारतीय बाजार वैश्विक खिलाड़ियों को क्या देता है?

मनचंदा: धारणा और शायद वास्तविकता भी यही है कि भारत में, चीन की तुलना में, कम दीवारें है। अधिक खुला, अधिकतर "मोबाइल-पहले" वाली जनसंख्या बाजार के संयोजन, प्रयोग और सीखने के लिए आदर्श है। यह समझ मोबाइल की भूमिका की समझ में खासकर ई-कॉमर्स, विज्ञापन, भुगतान और अन्य मूल्य वर्धित सेवाओं के लिए बहुत जरूरी हैं।

प्रश्न: इस समय यह बड़े शेकअप क्यों हो रहे हैं? क्या यह डिजिटल भारत के लिये लड़ाई है?

मनचंदा: भारत के बहुबिलियन डॉलर के दूरसंचार क्षेत्र में 2010 में एक दर्जन से अधिक कंपनियां ग्राहकों के लिए संघर्ष कर रही थीं। अब ये संख्या लगभग आधी हो गई है और जल्द ही केवल तीन या चार प्रमुख बाजार ऑपरेटर होंगे। यह दोनों मर्जर इस तथ्य का प्रतिबिंब है कि भारतीय बाजार में अधिक ऑपरेटर थे और कन्सालिडेशन अनिवार्य था।

रिलायंस की दूरसंचार कंपनी जियो के सफल लॉन्च ने इसे तेजी से बढ़ाया है। वे मुनाफे की बजाय ग्राहकों को प्राप्त करने में सक्षम थे। भारत का बहुमत मोबाइल से वेब ऐक्सेस करता है तो वो पाइप नियंत्रित करने वाली कंपनियां पाइपों के माध्यम से बहने वाले मूल्यों को अधिक उपयुक्त बनाती हैं। इसलिये, हाँ, यह "मोबाइल इंडिया" की लड़ाई है।