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टाटा स्टील ब्रिटेन से निकल रहा है : यू-एम विशेषज्ञ स्थिति पर चर्चा कर सकते हैं

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विशेषज्ञ ऐड्वाइज़री

भारत का टाटा स्टील ब्रिटेन का सबसे बड़ा स्टील उत्पादक है। उन्होनें यूनाइटेड किंगडम में अपने आपरैशन्ज़ को बेचने का फैसला किया हैं जो देश भर के हजारों श्रमिकों और छोटी कंपनियों के लिए संकट का कारण बन गया हैं ।

मिशिगन यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ इस परिणाम और इसके संबंध पर चर्चा कर सकते हैं:

पुनीत मनचंदा रॉस बिजनेस स्कूल में मार्केटिंग के प्रोफेसर हैं। उनकी विशेषज्ञता उभरते क्षेत्रों के बाजार, भारत में व्यापार, और रणनीति और विपणन के मुद्दें हैं।

"इस्पात उत्पादन, स्थानीय नहीं वैश्विक बिजनेस हैं। वैश्विक मांग में गिरावट के साथ आपूर्ति सबसे कम लागत वाले खिलाड़ी के अलावा बाकी सभी के लिये मुक़ाबला कठिन बना देता है।
टाटा ने अपने ब्रिटिश संयंत्र की लाभप्रदता के लिये लगातार संघर्ष किया है और इसे जारी रखना अनाकर्षक हो गया है। "

"कोरस ऐक्वज़िशन के माध्यम से ब्रिटेन में टाटा की एन्ट्री को "समझदार" के बजाय 'भावुक' के रूप में देखा गया था । आम सहमति है कि टाटा ने इसके लिये बढा प्रीमियम दिया हैं। लेकिन टाटा का नया नेतृत्व इस पर अलग नज़रिया ले रहा है। हालांकि यह ब्रिटेन के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन कठोर वास्तविकता यह है कि ब्रिटेन संरचनात्मक रूप से इन उद्योगों में खेलने के लिए तैयार नहीं है। "

संपर्क करें: 734-936-2445, This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.


एम. एस. कृष्णन रॉस बिजनेस स्कूल में ग्लोबल एसोसिएट डीन है। उनके अनुसंधान विशेषज्ञता में भारतीय कारोबार और कम्प्यूटर सूचना प्रणाली है।

"टाटा स्टील ने एंग्लो-डच स्टील कंपनी कोरस को 2007 में लगभग 11 अरब से खरीदा। उस समय टाटा स्टील, हालांकि एक क्षेत्रीय खिलाड़ी, लेकिन सबसे लाभदायक स्टील कंपनियों में से एक था। इस ऐक्विज़िशन का तर्क विकसित बाजारों जैसे कि यूरोप तक पहुँचना, क्षमताओं में तालमेल आकर्षित करना और विशाल आकार और संयुक्त इकाई के संसाधनों के माध्यम से कार्यक्षमता पाना। "

"पिछले 10 वर्षों में, उन्हें कई बाहर और आंतरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। पहले वैश्विक मंदी ने स्टील की मांग कम दी। दूसरा, चीन की अर्थव्यवस्था में मंदी ने ग्लोबल बाजारों को सस्ती चीनी स्टील से भर दिया जिसने टाटा स्टील के ब्रिटेन के आपरेशनों को प्रभावित किया।

आंतरिक रूप से, संयुक्त इकाई में कई संस्कृतियों मिली हुई थी जिससे परिचालन तालमेल एक चुनौती बन गया। इसके अलावा, ब्रिटेन के यूनियन कर्मचारीयों ने तेजी से बाजार की मांग में परिवर्तन के साथ बदलना मुश्किल कर दिया। परिणाम के रूप में पिछले कुछ वर्षों में पैसे गँवाने के बावजूद ब्रिटेन में उत्पादन के स्तर को बनाए रखना पडा। इसलिए इसे बेचने या बंद करने का निर्णय लिया गया।"

"निश्चित रूप से इस फैसले का सामाजिक अनुमान जाँब लॉस हैं। लेकिन टाटा स्टील एक सार्वजनिक कंपनी है, और वे अपने शेयरधारकों के प्रति जवाबदेह हैं। अब ब्रिटेन के स्टील उद्योग में और एकीकरण होगा, शायद राष्ट्रीयकरण भी होगा या वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान अमेरिका के वाहन उद्योग जैसे स्टील कंपनियों को सरकार की ओर से सब्सिडी भी मिल सकती है।"

"हालांकि, विश्व स्तर पर और चीन में स्टील की मांग में जल्द ही स्पाइक नहीं होने जा रहा है। इसलिए ब्रिटेन स्टील निर्माताओं को चीन और अन्य देशों से सस्ते स्टील के साथ मुक़ाबला करना पडेगा। यह ब्रिटेन के लिए दोनों आर्थिक और सामाजिक चुनौती है। "

संपर्क करें:: This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it., (734) 763-6749